वह बच्चा
दिन गुज़र जाते है पर किस्से और लोग याद रह जाते है ।हर दिन कोई ना कोई कहानी जन्म लेती है बस उस कहानी को कोई सुनाने वाला चाहिए । बात कुछ दिनों पहले की थी लगभग दिवाली का समय था । जैसा आप सभी जानते है की दिवाली की सफ़ाई और तैयारी महीनों पहले ही शुरू हो जाती है । मैं भी बड़े ज़ोर शोर से तैयारी में लगी हुई थी । घर साफ़ करने के बाद जिस चीज़ में मुझे मज़ा आता है वह है शिपिंग । चाहे घर पे चीज़ें होती है पर दिवाली पर वही चीज़ नई आती है ।मैंने कुछ ऑनलाइन शॉपिंग की और बहुत सी बाज़ार जाकर क्यूँकि दिवाली में बाज़ार की रौनक देखने से ही बनती है । वैसे तो अक्सर मैं अपने प्राणप्रिय के साथ शिपिंग करती हूँ पर इस बार उनकी व्यस्थता के कारण मैंने दिए गए अवसर का अकेले भरपूर आनंद लिया । मार्केट हर रोज़ की तरह ११ बजे तक खुलता था । मैंने भी अर्ली लंच करके , बैग में सामान की लिस्ट , सनग्लासेस और पर्स डालकर मार्केट की ओर निकल पड़ी । मार्केट पास में ही था तो पैदल चलकर १० मिनट में जब पहुँची तो वहाँ पहले से ही बहुत भीड़ थी ऐसा लगा जैसे सेल चल रही होगी । अपने आसपास जगमगाते हुए चहरों को देख , मैंने भी अपने चहरे में बैठ...