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Showing posts from January, 2025

जब हर जगह प्यार होगा ।

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                                                                                 जब हर जगह प्यार होगा , ना यह तेरा ,ना यह मेरा ,इस पे ना तकरार होग, जब हर जगह प्यार होग।  हर मौसम खुशगवार होगा , पतझर भी बसंत लगेगा , सूरज की तपिश ,चाँदनी से शीतल होगी, जब हर जगह प्यार होग।  अधरों पे रखी मुस्कान जब खिलखिलाएगी , सपनो के भोझ के तले आँखें जब टिमटिमायेगी , जब हर जगह प्यार होगा ।  आसमा में रंग भिखेरती तितलियाँ जब भवरों के संग बगिया में इठलाएगी , मद-मस्त पवन झूमती लताओं के संग पेंग बढ़ाएगी , जब हर जगह प्यार होगा ।  शाम की भटकी हुई सुर्ख लाली जब गालो को सहलाएगी , और जब अनकहे शब्द कानो में मिश्री से गूंजेगे ,  रेत से तप्ति ज़मीं ,पैरों के छालों पे सेख लगाएगी ,  और बारिश की बूंदे तन और मन को शीतल कर जाएगी , जब हर जगह प्यार  होग...

मानो या ना मानो

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                                      मानो या ना मानो.....मानो तो सब कुछ ना मानो तो कुछ नहीं। ये किस्सा कोई मनघडंत वाकया नहीं पर एक आप बीती है। बात है 2017 की ,तब मैं अपने घर के पास एक जाने माने स्कूल मैं शिक्षिका के रूप में कार्यरत थी ।हमारे स्कूल की फ्रेंच टीचर ,बच्चो के लिए यूरोप का educational ट्रिप का विचार हम सभी स्टाफरूम में बैठे टीचर्स से साझा कर रही थी। मैं भी बड़ी उत्सुकता से उनकी बातों को ध्यान से सुन रही थी । उन्होने बताया की 8 दिन के ट्रिप में 4 देश जिसमे घूमना ,रहना और खाना, मात्र खर्च एक लाख सत्तर हज़ार रुपए था ।मेरे पूछने में उन्होंने बताया की अगर कोई टीचर भी जाने की इच्छुक है तो वो भी चल सकती है। मैं और मेरी एक और सहकर्मी के अलावा कोई और इच्छुक नहीं था । बच्चों का ट्रिप किसी कारण कैंसिल हो गया ,हमें बड़ी निराशा हुई ,पर जब फ्रेंच टीचर ने हमें सुझाव दिया की क्यों न इसे पर्सनल ट्रिप बना दिया जा...

सुकून

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                                                                             सुकून ......... क्या है दो पल का सुकून ? कहाँ मिलता है ? कहाँ रहता है ? कब आता है ? और कब जाता है ? हम इसे ढूंढ़ने के लिए क्यों इधर उधर भटकते है, जबकि हम सब को पता है की यह हमारे अंदर ही है।  लाइफ को हम सब ने race बना रखा , जब देखो हम किसी न किसी चीज़ के पीछे भागते रहते है ,इतना बिजी हो गए की जीना भूल गए और भागना सीख गए। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था। २२ साल मैंने भी नौकरी की एंड fortunately ,मैं एक टीचर थी। अब टीचिंग जॉब भी बहुत चल्लेंजिंग  हो गयी है। पहले था 8 से २, पर अब 8 से जब तक स्कूल मैनेजमेंट चाहे 😁।  भागती दौड़ती ज़िन्दगी में मैं भी सुकून के पल ढूंढ़ने लगी वह भी किस्मे पिक्चर देखने ,सैर सपाटा , शॉपिंग ,दोस्तों के साथ उठना बैठना ,आदि आदि पर इन सब से कुछ देर का सुकून तो ...