आस्था और विश्वास

 हर रोज़ की तरह मॉर्निंग वाक पे निकली थी ,उस दिल न जाने क्यों चलते चलते १२ क्लास की इंग्लिश बुक की एक कहानी मेरे दिमाग में घूमने लगा - जिसका टाइटल था The last lesson I इस कहानी में उस समय का वर्णन है जब जर्मनी ने फ्रांस के दो शहरो - एल्सेस और लोरेन पर कब्ज़ा किया और ये आदेश दिया की वहां के स्कूलों में केवल जर्मन पढ़ाई जाएगी I इस बात को सुनकर शहर के बच्चे और बुर्जग स्कूल में इक्खट्टा हुए क्यूंकि उस दिन स्कूल में फ्रेंच आखिरी बार पढ़ाई जानी थी I जब क्लास में आखरी बार फ्रेंच पढ़ाई जा रही थी तो बाहर पहले चर्च की घंटी की आवाज़ सुनाई दी, फिर मार्च करते हुए सैनिको की पदचाप की ,दोनों ही आवाज़े एक दूसरे के विपरीत थी I चर्च की घंटी का बजना शांति और विश्वास , का प्रतीक वही सैनिको को दी गयी कमांड बल और अशांति का प्रतीक था I 

 सुबह की सैर करते हुए कुछ ऐसा ही दृश्य था, एक तरफ ग्राउंड में हो रही थी परेड, जहाँ बहुत से जवान मॉर्निंग ड्रिल कर रहे थे और कदमताल करते हुए अपने कमांडर का आदेश ले रहे थे और दूसरी तरफ था ग्राउंड से लगा हुआ मंदिर ,जहाँ सुबह की आरती हो रही थी I ये दोनों ही आवाज़े सुनने में अलग थी पर इन दोनों का अर्थ एक ही था - शांति ,विश्वास ,सुकून I   

चलते चलते मन में एक विचार बार बार उठ रहा था ,मैं अपने आप को उस लेखक की जगह रख रही थी ,जिसने Last lesson Chapter का बड़ा ही हृदयमार्मिर्क वर्णन किया था I लेखक की मनोभावना को उसी रूप में समझना बड़ा मुश्किल था जिस समय उन्होंने इस कहानी को स्वरुप दिया था पर फिर भी कोशिश करके मैं इतना समझ पायी की कहानी के लेखक और कहानी के पात्रो की मनोदशा क्या रही होगी जब उनसे ये कहा गया होगा की अब आपकी भाषा आपकी नहीं रहेगी और आपको अपनी मातृभाषा को छोड़ कर दूसरे देश की भाषा को सीखनी होगा I यह कल्पना से भी परे है की किसी भी देश के लोगो से कहा जाये की उनको अपनी मातृभाषा छोड़नी पड़ेगी और किसी और दूसरे देश की भाषा को सीखना होगा I पर उस समय का सत्य यही था I 

पर आज की बात कुछ और है ,सुबह की सैर ,परेड का होना ,भजन का बजना , ये सब बाते सुकून देने वाली थी ,क्यूंकि की हम किसी युद्ध में नहीं थे I हम हिंदुस्तानी हमेशा ये कोशिश करते है की युद्ध को टाला जाये जब तक दुश्मन अपनी हद में है I और जब हद पार हो जाती है तब Operation Vijay और Operation Sindoor जैसे निर्णायक Operations से दुश्मन को उसकी जगह पर बैठना पड़ता है I 

 

 

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