ज़िन्दगी और मै , या मेरी ज़िन्दगी
ज़िन्दगी से पहले हेलो ,हाय थी ,अब दोस्ताना हो गया।,
पहले नुक्कड़ पर खड़े होकर किया करते थे बातें ,अब उसका मेरे घर आना जाना हो गय।
एक दिन सोचा क्यों न ज़िन्दगी को चाय पे बुलाया जाये ,
कुछ उसकी सुनु और कुछ अपना सुनाया जाये।
शाम को ज़िन्दगी से चाय पे मुलाकात थी ,
साथ कुछ पल का ही होगा ,अभी तो यह शुरुआत थी।
ज़िन्दगी मेरे सामने थी बैठी और टकटकी लगाए मैं उसे देखता ,
कभी वो मुझे लगे अपनी सी ,कभी मैं उसमे कुछ टटोलता।
मन में थे सवाल कई सारे सोचा ज़िन्दगी से पूछ ले ,
मौका आज ही है ,फिर मिले या ना मिले।
मैंने ज़िन्दगी से पूछा क्यों बदलती हो तुम रंग पल पल ?
ज़िन्दगी हँसके बोली "बेरंग जीने से अच्छा क्यों न हो उसमे हलचल ।
फिर मैंने ज़िन्दगी से पूछा ," क्यों हंसती और क्यों रुलाती है ज़िन्दगी।?"
" दुःख क्या है ,और क्या सुख है इसका फर्क कराती है ज़िन्दगी ।
"क्यों चार दिन की है ज़िन्दगी ?"
" जब चार दिशाओं और चार पेहेर ने बांधा है हम सब को, तो चार दिन की ज़िन्दगी का मज़ा ले ले अब तो "
(ज़िन्दगी अब शायद मेरे सवालो से थोड़ा परेशान हो गयी ,और बोली )
"अच्छा अब चलती हूँ फिर कभी आऊँगी ,जल्दी क्या है वक़्त आने पे बहुत कुछ बतलाऊँगी "।
ज़िन्दगी आगे बढ़ी और मैं उसके पीछे चल पड़ा ,
फिर ज़िन्दगी का हाथ थामे कुछ कदम आगे बड़ा।
अभी द्वार पर पहुंचे थे दोनों , तो देखा कोई मेरा पता है पूछता ,
कौन है वह जो मुझसे मिलने के लिए द्वार मरे है खड़ा।
" अरे यह तो ख़ुशी है जो कई दिनों बाद मेरे घर आयी है ,
देखकर जिसको आखों पे नमी उतर आयी है "।
पहले हम ख़ुशी को ढूंढ़ते थे आज वोह मेरा पता पूछे और बोले कुछ पल ठरूँगी यहाँ जमाना हो गया तुमसे रूबरू हुए।
ज़िन्दगी खुशियों की सौगात ले कर आयी है ,
मानो अंधेरी रात में चांदनी उतर आयी है।
अब ज़िन्दगी और ख़ुशी से मेरा गहरा याराना हो गया ,
दोनों का मेरे घर अब अक्सर आना -जाना हो गया।
दोनों का मेरे घर अब अक्सर आना जाना हो गया।
❣️
ReplyDelete😊😊💐
Delete